गुरुग्राम की एक अदालत ने तहसीलदार व NT की सरकारी गाड़ी को कुर्क कर पीड़ित को सौंपी चाबी।

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गुरुग्राम, संवाददाता : गुरुग्राम जिले की सोहना अदालत ने एक शामलात पट्टी की जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े एक मामले में जिला सेशन कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर सख्त कार्रवाई करते हुए तहसीलदार और नायब तहसीलदार की दोनों सरकारी गाड़ियों को कुर्क करने के आदेश देकर याचिका कर्ता को सौंप दिया। अदालत की इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित महेश कुमार व अन्य का कहना है कि वह वर्ष 2014 से अपनी जमीन की रजिस्ट्री करवाने के लिए सोहना तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहा है। लंबे समय से प्रयास करने के बावजूद उसकी करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन की रजिस्ट्री नहीं की गई।

पीड़ित के अनुसार, कोर्ट के आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने जमीन की रजिस्ट्री करने की कार्रवाई नहीं की। पीड़ित के अनुसार बताया गया है कि उनकी करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन सोहना के साथ लगती हुई शामलात पट्टी की है। उसके अनुसार कुछ दिनों पहले तत्कालीन तहसीलदार ने इस जमीन के कुछ हिस्से की रजिस्ट्री कर दी थी, लेकिन शेष हिस्से की रजिस्ट्री करने से इनकार कर दिया गया।पीड़ित का कहना है कि जब समान परिस्थितियों में जमीन के एक हिस्से की रजिस्ट्री की जा चुकी थी तो बाकी जमीन की रजिस्ट्री रोकने का कारण उसे समझ नहीं आया। जबकि इस तरह की जमीन की सैकड़ों रजिस्ट्री सोहना तहसील में की गई है। जिसको लेकर पीड़ितों अदालत की शरण ली थी। जिसमें अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा कि जिस समय शामलात पट्टी की जमीन की रजिस्ट्री की गई थी, उस समय ऐसा करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई थी या नहीं। साथ ही यह भी जानना चाहा कि यदि जमीन के एक हिस्से की रजिस्ट्री की गई थी तो दूसरे हिस्से को किस आधार पर रजिस्ट्री से वंचित रखा गया।

*अदालत के आदेश पर भी नहीं की रजिस्ट्री*

अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद भी पीड़ित की जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकी। इसके बाद अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार और नायब तहसीलदार की सरकारी गाड़ियों को अटैच करने के आदेश दिए। आदेश के तहत दोनों सरकारी वाहनों को पीड़ित महेश कुमार व अन्य को सौंप दिया

*पोर्टल में प्रावधान नहीं होने का दिया हवाला*

वहीं राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान समय में रजिस्ट्री के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पोर्टल में इस प्रकार की जमीन की रजिस्ट्री के लिए आवश्यक प्रावधान उपलब्ध नहीं है।अधिकारियों के अनुसार, इसी तकनीकी व्यवस्था के कारण रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। उनका यह भी कहना है कि मैनुअल रजिस्टर की व्यवस्था फिलहाल पूरी तरह बंद है, जिसके कारण पोर्टल के माध्यम से ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।हालांकि पीड़ित पक्ष का आरोप है कि वर्ष 2014 से लगातार तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद उसे अपनी जमीन की रजिस्ट्री नहीं मिल पाई। अब अदालत द्वारा दोनों अधिकारियों की सरकारी गाड़ियों को कब्जे में लिए जाने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। जिससे जिले में हड़कंप मचा हुआ है।

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