राज्य सूचना आयोग के आदेश की अवहेलना,रजिस्ट्रार फॉर्म एंड सोसाइटी के PIO को भेजा शो कॉज नोटिस,पुर्व भ्रष्ट पार्षद की भुमिका पर प्रश्न चिन्ह?

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गुरुग्राम, संवाददाता : आरटीआई एक्ट 2005 को लागु हुए देश में करीब 20 साल से भी ज्यादा का समय बीत गया है, लेकिन अभी तक भी प्रदेश सरकार के विभागों में बैठे भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारी अपने भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए आरटीआई एक्टिविस्टों को दर-दर की ठोकरे खाने पर मजबूर कर रहे हैं, जबकि सूचना न देने पर सूचना आयोग द्वारा समय-समय पर अधिकारियों को जुर्माना व हजाने से भी दंडित कर रहे हैं। लेकिन फिर भी लापरवाह अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। जिससे विभाग में फैले भ्रष्टाचार को जागरूक नागरिक रोकने में अपने आप को लाचार समझ रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में राज्य सूचना आयोग ने गुरुग्राम के रजिस्ट्रार फॉर्म एंड सोसाइटी कार्यालय के जन सूचना अधिकारी को सूचना उपलब्ध कराने के लिए अंतिम अवसर देते हुए शो कॉज नोटिस जारी कर तलब किया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गुरुग्राम के सेक्टर 22 निवासी एक जागरूक नागरिक ने आरटीआई एक्ट 2005 के तहत अपने सेक्टर में हुए विकास कार्यों तथा आरडब्ल्यूए को प्राप्त राशि तथा किस किस विकास कार्यों में हुए खर्चों का समस्त विवरण बिलो की रसीदें मांगी थी। वहीं सक्षम आरडब्ल्यूए द्वारा सक्षम सोसाइटी के बैंक खातों से निकलवाए 5 लाख तथा डेढ़ लाख रुपए (6.5 लाख ) कहां पर किस कार्य पर खर्च हुए समस्त जानकारी जाननी चाही थी। जिसकी जानकारी आवेदक को समय पर नहीं मिलने पर पहले प्रथम अपील दायर की थी, जिसके बाद द्वितीय अपील के लिए हरियाणा सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया था। जिसकी सुनवाई के बाद सूचना आयुक्त ने 15 दिनों के अंदर मांगी गई सूचना आवेदक को देने के लिए जन सूचना अधिकारी को आदेश दिए थे।

इसके बाद भी गुरुग्राम के जन सूचना अधिकारी एवं रजिस्ट्रार फॉर्म एंड सोसाइटी में बैठे लापरवाह अधिकारियों ने सूचना आयोग के आदेश की पालना नहीं की। जिस पर निराश होकर आवेदक ने पहले जन सूचना अधिकारी को तथा उसके बाद सूचना आयोग को गुहार लगाई कि आपके आदेश का भी जन सूचना अधिकारी उल्लंघन कर रहा है। जिस पर सख्त कार्रवाई करते हुए जन सूचना अधिकारी को शो कॉज नोटिस जारी कर पहले रिप्लाई तथा व्यक्तिगत आयोग ने उपस्थित होने के आदेश पारित किए हैं। आयोग ने नोटिस में यह भी लिखा है कि क्यों ना आपको ढाई सौ रुपए प्रतिदिन के हिसाब से ₹25000 रुपए जुर्माना से दंडित किया जाए।

बता दें कि यह मामला वर्ष 2024 से चल रहा है, तथा आगामी तारीख 24 जून 2027 लगी है। वहीं सैक्टर में इस बात की चर्चाएं है कि उक्त सोसाइटी की आरडब्ल्यूए में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है, जिसका मास्टरमाइंड एक पूर्व भ्रष्ट बीजेपी पार्षद हैं जो आजकल प्रदेश के एक मंत्री की जी हजूरी में लगा हुआ है, उसी ने ही अभी हाल ही में चालाकी से आरडब्ल्यूए के चुनाव भी करा दिए थे। जिसमें भी काफी नियम कानून को दर किनारे कर विभाग में बैठे लापरवाह व भ्रष्ट कर्मचारियों की मिली भगत से कागज़ी कार्यवाही में लिपापोती कर दी गई थी। जिस पर भी उक्त नागरिक ने रजिस्ट्रार को अवगत कराया था। अब देखना यह होगा कि अभी तक को मांगी गई सूचना उपलब्ध हो पाती है या अधिकारी भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए अपने ऊपर जुर्माना लगवा लेते हैं। क्योंकि भ्रष्ट अधिकारियों में यह धारणा बनी हुई है कि जब करोड़ों लाखों के घपले होते हैं तो 20- 25 हजार का जुर्मान लगने से उन पर कोई असर नहीं पड़ता है।

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