गुरुग्राम के गांव धुमसपुर के किसानों की जमीन हड़पने के लिए बिल्डर ने कोर्ट स्टे के बाद भी कराईं फर्जी रजिस्ट्री।

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गुरुग्राम, संवाददाता : जिले के गांव धुमसपुर सेक्टर-67ए में एक बिल्डर पर गांव के किसानों की बेशकीमती पुश्तैनी जमीन हड़पने का आरोप लगाया है। बृहस्पतिवार को शमा पर्यटक केंद्र में प्रेस कांफ्रेंस कर गांव के किसानों ने कहा कि कोर्ट के स्टे के बावजूद फर्जी रजिस्ट्री करा दी गई। पीडि़त किसान हेमंत खटाना, अमित खटाना, रोहित खटाना, तिलक एवं जतन देवी ने कहा कि उनकी 94 कनाल 10 मरला पुश्तैनी कृषि भूमि को हड़पने की यह बड़ी साजिश रची गई। किसानों ने इस मामले में अधिकारियों पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि अगर एक सप्ताह में आरोपी बिल्डर, अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती है तो प्रदेश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कभी किसी व्यक्ति या कंपनी के नाम पर अपनी जमीन का बैमाना या रजिस्ट्री नहीं की। उनकी जमीन को अवैध तरीके से दूसरे के नाम दर्ज करा दिया गया।

उन्होंने कहा कि दो अक्टूबर 2010 को बिल्डर अमित कत्याल के साथ एक अनरजिस्टर्ड मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) किया गया था। इसमें शर्त रखी गई थी कि बिल्डर 45 दिन के भीतर पूरा भुगतान करके रजिस्ट्री कराएगा।बिल्डर ने तय शर्त के अनुसार ना तो भुगतान किया और ना ही रजिस्ट्री कराने के लिए उनसे संपर्क किया। हेमंत खटाना ने कहा कि किसानोंं ने वर्ष 2016 तक लगातार रजिस्ट्री कराने के लिए आवेदन किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद किसानों ने लीगल नोटिस देकर एमओयू को रद्द कर दिया। बिल्डर अमित कत्याल की ओर से गुरुग्राम सिविल कोर्ट में केस दायर किया गया, जिसमें उसने अदालत से बकाया भुगतान कर अपने पक्ष में रजिस्ट्री कराने की मांग की। किसानों का कहना है कि बिल्डर ने तय शर्तों का पालन नहीं किया। इसलिए उसका रजिस्ट्री को लेकर कोई अधिकार नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि सिविल कोर्ट ने जमीन के हस्तांतरण पर रोक भी लगाई जा चुकी है। ऐसे में जमीन की कोई खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकती। इसके बाद भी अमित कत्याल, कमल कपूर और लिक्विडेटर वीरेंद्र शर्मा ने आपसी मिलीभगत से फर्जी सेल सर्टिफिकेट जारी करवा लिया और उसी के आधार पर रजिस्ट्री करवा दी।

किसानों का आरोप है कि तहसील बादशाहपुर के अधिकारियों को इस मामले की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने मिलीभगत करके अवैध रजिस्ट्री करवा दी। किसानों ने यह भी कहा कि इस मामले में उपायुक्त व पुलिस को भी शिकायत दी गई, लेकिन न तो तहसील अधिकारियों के खिलाफ कोई जांच शुरू की गई और ना ही आरोपियों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज की गई। इससे किसानों में रोष है। उन्होंने मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ तुरंंत एफआईआर दर्ज की जाए। निष्पक्ष जांच कर सभी को जेल भेजा जाए, वहीं दोषी राजस्व अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए।

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