गुरुग्राम, संवाददाता: गुरुग्राम के सोहना रोड स्थित मालिबू टाउन कॉलोनी में अवैध निर्माण का मामला डीटीपी के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। जबकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। जिसमें विभाग दूसरे पक्ष को फायदा पहुंचने की नीयत से अदालत को जानबूझकर कर सही रिपोर्ट नहीं दे रहा है। जिंससे विभाग में तैनात लापरवाह अधिकारियों पर उंगलियां उठ रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उक्त सोसायटी में रहने वाले एक स्थानीय निवासी ने जनहित व सरकार हित में अपने पड़ोस में प्लॉट नंबर WW-40 और WW-41 में हो रहे अवैध निर्माण,जैसे अतिरिक्त कमरे,लिफ्ट और फ्लोर बनाने की शिकायत डीटीपी सहित उच्च अधिकारियों को जनवरी में भेजी थी। इस पर जिला नगर योजनाकार (प्रवर्तन) विभाग ने स्थल का निरीक्षण कर नोटिस जारी किया था। जिसमें कई अनियमितताएं पाई गईं। डीटीपी ने जांच के बाद संबंधित संपत्ति मालिकों को हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1975 की धारा 3B के उल्लंघन में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जिसका उल्लंघनकर्ताओं ने कोई रिप्लाई नहीं दिया गया। वहीं अधिकारियों की खानापूर्ति व मिली भगत की जानकारी का आभास होने पर शिकायतकर्ता ने अवैध निर्माणों को रोकने के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी। जिसमें अवैध निर्माण को रोकने और ध्वस्त करने की मांग की गई थी।
मामले में प्रतिवादी डीटीपी ने करीब एक साल में दस तारीख लेने के बाद भी अपनी रिपोर्ट अदालत में दाखिल नहीं की। जिसपर पीड़ित ने जिले में लगने वाले साप्ताहिक समाधान शिविर में उपायुक्त दरबार में दरखास्त दी,जिसपर डीटीपी ने लिखित में जवाब दिया कि उपरोक्त मामले में शिकायतकर्ता की दी हुई शिकायत सही है। जिस पर विभाग इसलिए कार्रवाई करने में असमर्थ है क्योंकि मामला अदालत में विचाराधीन है तथा कोर्ट से यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश पारित किए हुए हैं। जबकि ना तो अदालत से यथास्थिति बनाए रखने की कोई आदेश पारित हुए हैं और ना ही डीटीपी ने आज तक अपना जवाब अदालत में दाखिल किया है, जबकि उपायुक्त दरबार में वही बात लिख कर दे रहे हैं कि निर्माण अवैध बना हुआ है, जिससे यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सारे मामले में विभाग की मिलीभगत व भ्रष्टाचार होने का आभास साफ नजर आ रहा है। जबकि डीटीपी ने जो रिपोर्ट उपायुक्त के समाधान शिविर में दाखिल की है,अगर वही रिपोर्ट अदालत में दे देते तो अदालत अवैध निर्माण पर रोक भी लगा देती तथा निवासियों को भी राहत अवश्य मिलती। जबकि जिले के कई मामले ऐसे भी सामने आए जिसमें अदालत में मामला होने के बाद भी अधिकारियों ने भेदभाव की नीति या ऊपरी दबाव के चलते पीला पंजा चलाया है। लेकिन उक्त मामले में अदालत के नाम से लोगों को खुली छूट दे रहे हैं।
बता दें कि डीटीपी अमित मंगोलिया काफी समय से जिले में तैनात है,जिनपर काफी भेदभाव के आरोप लगें हैं,मालीबू टाऊन में भी उक्त स्थान पर देखने भी नहीं गए तथा 7-8 मकान दूर तोड़-फोड़ करके गए थे, वहीं अभी हाल ही में पटौदी रोड पर भी गांव झुडली सराय में भी एक बीजेपी के पूर्व पार्षद द्वारा अवैध रूप से काटी गई अवैध कॉलोनी पर भी पीला पंजा चलाया था। लेकिन बाद में कुछ लेनदेन के बाद मामला शांत हो गया था। वहीं पालम विहार के कृष्णा चौक व सेक्टर 21, 22 ,23 तथा पुरानी दिल्ली रोड के भी कई मामलों पर उंगलियां उठ चुकी है। वहीं स्थानीय सरस्वती कुंज में एक बीजेपी के दिग्गज नेता की पांच मंजिला महल नूमा बिल्डिंग मामले में भी सबकुछ जानते हुए मौन बना रहे।
जबकि हाईकोर्ट को दिखाने के लिए मिडिया में बयान बाजी कर सुर्खियां बटोरते रहते हैं, वहीं सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि उन पर सीआईडी की भी नजर बनी हुई है। इससे यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी वह जिले के मंत्री राव नरबीर सिंह मीडिया में तो भ्रष्टाचार मिटाने के दावे करते रहते हैं लेकिन असल में प्रदेश व जिले से भ्रष्टाचार रोकने में असहाय नजर आ रहे हैं। जब इस बारे में डीटीपी से सम्पर्क किया गया तो उनसे बात नहीं हो सकी, इसलिए उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।


