
गुरुग्राम, संवाददाता : गुरुग्राम के पॉश क्षेत्र डीएलएफ में अवैध निर्माण और अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ जिला डीटीपी विभाग फिर से तोड़-फोड़ व सीलिंग की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का कहना था कि 30 जून तक की छुट समय सीमा समाप्त होते ही पॉश इलाकों में तोड़फोड़ और सीलिंग ड्राइव शुरू होगी। वहीं गुरुवार को रेजिडेंट्स ने तोड़-फोड़ व सीलिंग के खिलाफ प्रदर्शन और रोष मार्च निकाला है।अधिकारियों ने डीएलएफ फेस एक से 5 तक तमाम रेजिडेंट्स और किराएदारों को इस कार्रवाई के बारे में पोस्टर बांट जानकारी दे दी है। इस अभियान के तहत सबसे बड़ा एक्शन स्टिल्ट पार्किंग के अवैध निर्माण और अवैध पीजी पर होने जा रहा है। प्रशासन के इस कड़े रुख से अवैध निर्माणकर्ताओं में हड़कंप मच गया है। जिसमें विभाग स्टिल्ट पार्किंग में अवैध कब्जे और अतिक्रमण पर वार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विभाग के नियमों के मुताबिक इमारतों में बनी स्टिल्ट पार्किंग केवल वाहनों को पार्क करने के लिए आरक्षित है। लेकिन शिकायतें मिली हैं कि कई मकान मालिकों और व्यावसायिक संस्थाओं ने इस जगह पर अवैध कमरे, दुकानें या गोदाम बना लिए हैं। डीटीपीई का कहना था कि स्टिल्ट पार्किंग का व्यावसायिक या निजी इस्तेमाल पूरी तरह गैर-कानूनी है। आगामी 30 जून के बाद इन सभी अवैध ढांचों को जेसीबी की मदद से ढहा दिया जाएगा। विभाग के रडार पर केवल पार्किंग ही नहीं, बल्कि आम रास्तों को रोकने वाले अतिक्रमण भी हैं। पॉश कॉलोनियों की सड़कों और फुटपाथों पर अवैध रूप से रखे गए पोर्टा केबिन, सुरक्षा गार्डों के कमरे, अवैध ग्रिल और सड़कों पर जबरन बनाई गई पार्किंग को पूरी तरह से साफ किया जाएगा।अधिकारियों का कहना है कि इन अवैध कब्जों के कारण न केवल ट्रैफिक जाम लगता है, बल्कि आपातकालीन वाहनों जैसे एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड को निकलने में भी भारी परेशानी होती है।
*पीजी और गेस्ट हाउस होंगे सील*
पॉश रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रहे पेइंग गेस्ट और गेस्ट हाउस पर भी विभाग सख्त एक्शन लेगा। बिना अनुमति, बिना फायर एनओसी और आवासीय नियमों का उल्लंघन कर चलाए जा रहे इन पीजी और गेस्ट हाउसों को चिह्नित कर लिया गया है। समय सीमा खत्म होते ही इन सभी इमारतों को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
* कॉर्पोरेट किराएदारों को 30 जून तक की थी मोहलत*
विभाग की तरफ से रिहायशी इलाकों में चल रहे कॉर्पोरेट कार्यालयों और वहां रह रहे लोगों राहत देते हुए 30 जून तक का समय दिया था। विभाग ने उन्हें अपनी शिफ्टिंग पूरी करने की अंतिम चेतावनी दी है। यदि 30 जून तक कॉर्पोरेट किराएदार रिहायशी परिसरों को खाली नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ भी सीलिंग और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
*तोड़फोड़ व सीलिंग के विरोध में रेजिडेंट्स कर रहे प्रदर्शन*
हालांकि बीते वीरवार से डीएलएफ फेज-3 के यू-ब्लॉक मेट्रो पार्क में एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया। इसके बाद गुस्साए लोगों ने सड़कों पर उतरकर “स्टॉप सीलिंग, स्टॉप डेमोलिशन” के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन किया और साइबर सिटी की चमचमाती ऊंची इमारतों के पास मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने सीधा आरोप लगाया कि प्रशासन बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक रिहायशी मकानों को निशाना बना रहा है। तोड़फोड़ की इस मुहिम से न केवल मकान मालिकों का भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि सालों से रह रहे परिवारों में भी दहशत और असुरक्षा का माहौल है। सीएम से लगाईं गुहार। डीटीपीई अमित मधोलिया ने एक युटुबर को दिए बयान में कहा कि आम जनता से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण से दूर रहें ताकि उन्हें वित्तीय या कानूनी नुकसान न उठाना पड़े। अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है। उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
*जानिए आखिर ऐसा विवाद होता क्यों है*
बता दें कि लोगों में इस बात की भी आम चर्चाएं है कि पहले तो सीट पर बैठे भ्रष्ट अधिकारी मोटी रिश्वत लेकर अवैध निर्माण करवा देते है, जिसकी जब स्थानीय जागरूक नागरिकों द्वारा विभाग को शिकायत दी जाती है तब अधिकारी कई सालों तक मामलों में कार्रवाई करने की बजाय लटका कर रखते हैं, यहां तक कि अदालत में केस डालने के बाद भी कई सालों तक अपना जबाव भी नहीं देते हैं,तब तक अवैध निर्माण करने वाले उनकी शय से अपना कार्य समाप्त करके अवैध वसूली शुरू कर देते हैं। ऐसे अनेक मामले गुरुग्राम सहित पूरे देश के हर शहरों में चल रहे हैं। गुड़गांव में तो डीटीपी की इसी तरह की लापरवाही का एक ताजा मामला मलिबु टाउन का काफी चर्चा में चल रहा है, वहीं पालम विहार के कृष्णा चौक पर भी एक भाजपा नेता का तीन मंजिला परिसर सरेआम प्रशासन के भ्रष्ट अधिकारियों को चिढ़ा रहा है। मामला जब हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चला जाता है,तब भ्रष्ट अधिकारी खानापूर्ति के लिए ना चाहते हुए भी मजबूरी में कार्रवाई कोर्ट के डंडे से करते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में लोग हाई कोर्ट नहीं जा पाते हैं। जिससे अवैध पीजी संचालक व लोगों के होंसले बुलन्द हो रहें हैं। लेकिन लोग इकट्ठे होकर भ्रष्ट मीडिया वालों का सहारा लेकर धरने प्रदर्शन कर शहर का माहौल खराब कर देते हैं, जिससे मजबूर होकर नेताओं को भी कुछ झुकना पड जाता है।
